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image search 1764927436958 कावड़ यात्रा सबसे पहले कौन स्टार्ट किया था जाने 2025 में यह न्यूज़ सारी जानकारी यहां पर

कावड़ यात्रा सबसे पहले कौन स्टार्ट किया था जाने 2025 में यह न्यूज़ सारी जानकारी यहां पर

कांवड़ यात्रा कब से चालू हुई …..

कावड़ यात्रा स्टार्ट कब हुआ था यही सोच खोज कर लोग आदमी बहुत सारे लोग जानते नहीं हैं तो चलिए आज हम बताते हैं  कभी सोचा है आपने कि कावड़ यात्रा की शुरुआत आखिर हुई कहां से? आज लाखों शिव भक्त गंगाजल लेकर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते हैं। लेकिन इस परंपरा का पहला यात्री कौन था? कोई साधु, कोई ऋषि, कोई भक्त? नहीं।

कांवड़ यात्रा सबसे पहले कब से चालू हुआ था…..

कावड़ यात्रा में सबसे पहले स्टार्ट करने वाला कौन था तो आज हम इस विषय में जानने की पूरी कोशिश करने वाले हैं अगर आप लोग के पास भी कोई ऐसी जानकारी हो तो आप लोग भी कमेंट के जरिए हमें बता दीजिए उसको सजा करिए तो हम इस बारे में आप लोगों को डिटेल्स में बताएंगे चलिए जानते हैं आज कावड़ यात्रा के बारे में जो भोलेनाथ को समर्पित है और यह पहले कौन और किसके द्वारा चलाया गया था
आश्चर्य की बात है कि सबसे पहला कावड़िया रावण था। कहानी शुरू होती उस समय से, जब रावण केवल एक क्रूर राजा नहीं बल्कि महाविद्वान, महापंडित और परम शिवभक्त के तौर पर जाना जाता था। यह कहते हैं कि वह ग्रंथों का अध्ययन करता था।

कांवड़ यात्रा कब चालू हुआ और कौन था
कांवड़ यात्रा कब चालू हुआ और कौन था

एक दिन पढ़ते-पढ़ते उसकी नजर समुद्रमंथन की उस अद्भुत कथा पर पड़ी जिसमें देव दानवों ने मिलकर समुद्र को मथा था और उसी में से हलाहल विष निकला था। वह विष इतना प्रचंड था कि ब्रह्मांड का अस्तित्व खतरे में पड़ गया। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए भयानक विष को पिया था।

विष के प्रभाव को शांत करने के लिए सभी देवताओं और असुरों ने शिव जी पर निरंतर जल चढ़ाया ताकि उनका शरीर शीतल रहे। रावण जब यह कथा पढ़ रहा था, उसके भीतर कुछ बदल रहा था। भक्ति की ज्वाला भड़क रही थी। उसने सोचा कि मेरे आराध्य शिव ने संसार को बचाने के लिए विष पिया, तो क्या मैं उनके लिए थोड़ा सा गंगाजल नहीं ला सकता?

लेकिन समस्या यह थी कि रावण जहां रहता था, वहां पर गंगाजल का नामोनिशान नहीं था। दूरी इतनी अधिक थी कि किसी साधारण व्यक्ति के लिए सोचना भी असंभव था। लेकिन रावण, वह तो असाधारण था। उसने संकल्प लिया, दूरी चाहे जितनी हो, रास्ता चाहे जितना कठिन हो, मैं जाऊंगा, गंगाजल लाऊंगा, शिवलिंग पर चढ़ाऊंगा।

यह कहते हैं कि एक लंबी कठोर यात्रा पर निकला घने जंगलों से, ऊंचे पर्वतों से, तपती धूप, कड़कती हवाओं से लड़ते हुए गंगाजी तक पहुंचा और अपने कंधों पर कावड़ में जल भरकर वापस लौटा भगवान शिव पर अर्पित किया। इस घटना को पहला प्रमाण माना जाता है कि इतिहास का पहला कावड़ यात्री रावण था।

क्योंकि सबसे पहले लंबी यात्रा करके अपने कंधों पर कावड़ रखकर शिव पर जल चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत रावण ने की थी। क्या इस कहानी को आप जानते थे? नहीं जानते थे तो बाकी दोस्तों से भी शेयर कीजिएगा और ऐसे तमाम किस्से कहानियों के लिए हमारे चैनल से जरूर जुड़िएगा। ओम नमः शिवाय।

कांवड़ यात्रा कब चालू हुआ और
कांवड़ यात्रा कब चालू हुआ और

निष्कर्ष…

कावड़ यात्रा में सबसे पहले जो स्टार्ट किया गया था वह आप लोगों को बता दिया गया है कि यहां से स्टार्ट किया गया था तो अगर आप लोगों को ऐसे ही जानकारी चाहिए तो इस पेज को फॉलो करें और सब्सक्राइब भी कर लीजिएगा क्योंकि ऐसे ही चटपटे न्यूज़ हम देते रहते हैं बहुत सारे ऐसे न्यूज़ हैं जो की सनातन धर्म के बारे में बताया गया है जो कुछ नहीं जानते हैं हम वह न्यूज़ आप लोगों को प्रोवाइड करते रहते हैं शेयर करे

कांवड़ यात्रा कब चालू हुआ
कांवड़ यात्रा कब चालू हुआ

डिस्क्लेमर…

कांवड़ यात्रा पर यह न्यूज़ हमें सोशल मीडिया से मिला है पर इस न्यूज़ को सही बनाने में आप लोग मदद करें क्योंकि अगर यह सही न्यूज़ है तो आप लोग भी कमेंट के जरिए हमें बताएंगे कि क्या यह न्यूज़ सही है इसके बारे में और भी हम जानकारी देते रहेंगे

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