खरमास क्या है…
और आज से खरमास का महीना शुरू हो गया। ज्यादातर लोग मानते हैं कि खरमास के महीने में कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए। लेकिन आपने सोचा है कभी कि खरमास के महीने की कहानी क्या है? क्यों इस वक्त शुभ काम ना करने की सलाह दी जाती है। आज इसके बारे में आपको बताते हैं। दरअसल खरमास साल में दो बार लगता है।

कितने प्रकार का खरमास….
पहला खरमास जब सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश करते हैं और दूसरा मीन संक्रांति के समय लगता है, ऐसा माना जाता है। खरमास पूरे एक महीने का होता है। खरमास से जुड़ी कहानी मार्कंडेय पुराण में मिलती है। संस्कृत में खर का मतलब होता है गधा।
अनेक कहानियों में जो बताया गया है वेद पुराण से लेकर जो भारतीय परंपराओं में चली जा रही है कहानियों का मतलब क्या होता है कहानियों का प्रकार क्या है सभी चीज बताने के बाद भी आज का जो जनरेशन है वह सभी चीजों पर मानता नहीं रखता है पर हम कुछ चीजों पर मान्यता रखते हैं
तो जैसे खरमास खरमास पर हमें क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए इस पर एक कथा है कथा को चलिए अपनों को हम बताते हैं क्या वह खाता किस प्रकार कही गई है और क्या यह कथा जो है इस पर लागू होता है कि नहीं होता है यह आप लोग कमेंट के जरिए बताइएगा

कथा क्या है…
खरमास की जो कहानी बताई जा रही है इस पर ध्यान देने की जरूरत है और सबसे पहले इसलिए जो कथा बताई जा रही है इसको पूरा पड़ेगा तभी समझ में आएगा की कथा कैसे और कब हुआ था
कथा के मुताबिक एक बार सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा कर रहे थे। घोड़ों को भूख प्यास लगी तो उन्हें आराम की जरूरत थी। ब्रह्मांड की परिक्रमा के दौरान घोड़ों की दयनीय हालत देखकर सूर्यदेव को भी तरस आ गया कि बेचारे बहुत थक गए हैं।
तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना इन्हें पानी पिला दिया जाए, थोड़ा आराम कर दिया जाए, दे दिया जाए। लेकिन फिर उन्हें लगा कि रथ रुक गया तो सृष्टि का चक्र प्रभावित हो जाएगा। सूर्यदेव की नजर तालाब के पास घूम रहे दो खर यानी दो गधों पर पड़ी। उन्होंने सोचा कि रथ में खर यानी गधों को लगा देते हैं।
घोड़ों को थोड़ी देर के लिए आराम भी मिल जाएगा। लेकिन घोड़ा और गधा के बराबर ही कैसे होगा। गधों को रथ से जोड़ने की वजह से सूर्यदेव के रथ की गति धीमी पड़ गई। इससे सूर्यदेव की परिक्रमा का समय बढ़ गया और किसी तरह एक महीने में चक्र पूरा हुआ। चूंकि यह परिक्रमा खर यानी गधों को रथ से जोड़कर एक महीने में पूरी हुई, इसलिए इसे खरमास कहते हैं। इस देरी की वजह से सूर्यदेव का तेज भी प्रभावित हुआ।

इसलिए इस महीने में शुभ काम ना करने की सलाह दी जाती है। तो अगली बार जब किसी सनातनी से आपकी खरमास को लेकर चर्चा होगी तो आपको पता होगा कि खरमास के महीने की असल कहानी क्या है। यह कहानी एक ऐसी चीजों पर बताया गया है जो भारतीय परंपराओं के अनुसार चलता है
अगर यह कहानी सच है तो आप लोग कमेंट के जरिए जरूर बताइएगा अगर यह कहानी झूठ भी है तो उसका भी आप लोग खानदान करेगा क्योंकि हमें पता चले कि यह कहानी सही है कि नहीं है और इस कहानी पर कितने लोग विश्वास करते हैं नवंबर के बाद अगर कोई चीज आती है
तो वह कर्म शादियों के बाद खरमास जो है वह लग जाता है ऐसे में कुछ चीज आप लोगों को पता होनी चाहिए कि खरमास कितने प्रकार का होता है क्या है कैसे सारे चीज में बताई गई है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि आप लोग किस प्रकार से खरमास में क्या करना चाहिए क्या नहीं उसके क्या कारण है
