तेजस्वी यादव का हर घर परिवार को नौकरी…
तेजस्वी यादव बिहार को बदलने के लिए कुछ भी कर सकते हैं अपने 20 वालों में उन्होंने एक जो वादा था वह है हर परिवार को एक नौकरी देने की वादा उन्होंने किया हुआ है जानते हैं उसे वादे में कहां तक साबित होते हैं
बिहार में सरकारी नौकरी….
बिहार में सरकारी नौकरी जो आंकड़ा आया हुआ है उसके अनुसार तेजस्वी यादव ने जो आंकड़ा बताया है कि हर परिवार को एक जान को नौकरी दिया जाएगा फिलहाल राशन कार्ड और सरकारी नौकरी को देखा जाए ऐसे में आंकड़ा लगाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है
कि कितना जा सकता है और वह 5 साल में क्या करोड़ की नौकरी दे सकते हैं अगर एक राज्य करोड़ की नौकरी दे सकता है तो वहां पर करोड़ों की रोजगार होना चाहिए उतना उद्योग धंधे उतनी कंपनियां सब कुछ होना चाहिए तब जाकर वह एक करोड़ से ज्यादा नौकरियां दे सकता है
बिहार को बदलने के लिए तेजस्वी यादव ने किया 20 वादे
तो कुछ आंकड़े हम पेश करते हैं जो कि बिहार की ही आंकड़े आप लोगों को हम बताने वाले हैं पहले तो हम हर परिवार का जो राशन कार्ड होता है उसके अनुसार हम चलते हैं तो बिहार में फिलहाल जो राशन कार्ड वितरित होता है उसकी संख्या है ” 1,87,63,805 ”

इतनी करोड़ की संख्या में राशन कार्ड फिलहाल मिलता है लोगों को हम अगर हर परिवार के हिसाब से ना चलकर हम राशन कार्ड के हिसाब से भी चलेंगे अगर 5 साल में इतनी करोड़ की नौकरी अगर एक राज्य दे देता है तो वह एक विकसित राज्य के रूप में माना जाता है
पर वहां पर रोजगार भी होता ना चाहिए कि हम करोड़ की नौकरी दे सके फिलहाल जो सरकारी नौकरी का आंकड़ा दिया गया है 2022 से 2025 के बीच में उसमें यह आंकड़ा 3 38 30 6 बताया गया है यह सरकारी नौकरी का आंकड़ा है जो युवाओं को मिला है
3 साल में अब यह समझ लीजिए कि जब 3 साल में 338000 लोगों को नौकरी मिली है तो 5 साल में इतनी करोड़ की नौकरी कौन दे देगा यह एक अपने आप में समझने की बात है नेता जो अपने वादों को पूरा नहीं कर सकते उसे वादों को वह ऐसे बताते हैं कि जैसे सबको वह चीज मिल जाएगी समझना हमें और आपको है क्या करना है क्या नहीं करना है

क्या हर परिवार को नौकरी मिल सकती है…
बिहार के युवाओं को नेताओं को जो वादा है उसको आज के कलयुग में सब समझते हैं सब जानते हैं सब पढ़े-लिखे हो गए हैं हां यह है कि जहां पर पढ़े-लिखे नहीं है वहां पर इतना समझ नहीं पाते हैं पर आज के जमाने में हर कोई पढ़ा लिखा मिलता है
ऐसे में अगर बिना आंकड़ों के पेश किया जाए कि हम हर परिवार को नौकरी देंगे तो वह एक संभव नहीं हो सकता अब उसमें कुछ ना कुछ उसमें टर्म और कंडीशन लगा देंगे जब उसे वादों को पूरा करने को आना रहेगा तो उसमें टर्म और कंडीशन लगा देंगे ऐसा नहीं ऐसा होना चाहिए तो वह चीज फिर गरीबों से हटके हो जाती है

निष्कर्ष…
बिहार में फिलहाल असंभव को संभव करने के लिए चुनाव जो हो रहे हैं उसमें नेताओं के द्वारा जो अपना शपथ पत्र बता रहे हैं लोगों को जो वादा है वह बता रहे हैं लोगों को कि हम ऐसा नहीं ऐसा कर देंगे पर जो संभव हो उतना ही लेकर चलें क्योंकि आंकड़ा जो है
कुछ कहता है और आप वादों के हिसाब से कुछ चल रहे हैं तो वह चीज संभव नहीं हो सकती फिलहाल हर घर परिवार को नौकरी देना संभव नहीं है अगर ऐसा हो जाता है तो बिहार जो है पहला राज्य बन जाएगा और विकसित राज्य भी बनने से कोई रोक नहीं सकता
